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मन की बात में मोदी ने कहा- हम सबका दायित्व है कि हम प्रकृति प्रेमी बनें, प्रकृति के रक्षक बनें
मन की बात में मोदी ने कहा- हम सबका दायित्व है कि हम प्रकृति प्रेमी बनें, प्रकृति के रक्षक बनें
मन की बात में मोदी ने कहा- हम सबका दायित्व है कि हम प्रकृति प्रेमी बनें, प्रकृति के रक्षक बनें
पिछली बार मोदी ने मन की बात में क्रिकेट से लेकर योग की बात की
मन की बात में मोदी ने कहा- हम सबका दायित्व है कि हम प्रकृति प्रेमी बनें, प्रकृति के रक्षक बनें
नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने रविवार को 46वीं बार मन की बात की। उन्होंने कहा कि देश के किसी हिस्से में काफी बारिश हो रही है तो कहीं अभी भी लोग बारिश की राह देख रहे हैं। जरूरी है कि हम प्रकृति प्रेमी और रक्षक बनें। मोदी ने कहा कि पिछले दिनों थाईलैंड में 11 खिलाड़ी और एक कोच गुफा में घूमने गए थे। अचानक भारी बारिश के कारण वे गुफा में 18 दिन तक फंसे रहे। इस दौरान दुनियाभर के लोग उनके लिए प्रार्थना कर रहे थे। हर कोई सोच रहा था कि बच्चे कहां हैं। अगर मानसून आ गया तो उन्हें निकालना मुश्किल होगा। वो बाहर आ गए और सब ठीक हुआ। इस पूरे घटनाक्रम को एक और नजरिए से भी देखा जा सकता है कि पूरा ऑपरेशन कैसा चला। हर स्तर पर जिम्मेदारी का जो अहसास था वो अद्भुत था। एक तरफ वो संकट से जूझ रहे थे तो दूसरी तरफ पूरे विश्व में मानवता एकजुट होकर मानवीय गुणों को प्रकट कर रही थी।
मोदी ने कहा, "चाहे सरकार हो, इन बच्चों के माता पिता हों या उनके परिवारजन हों, मीडिया हो, देश के नागरिक हों- हर किसी ने शान्ति और धैर्य का अद्भुत परिचय दिया। सब लोग एक साथ एक टीम की तरह मिशन में जुटे दिखाई दिए। हर किसी का एक संयमित व्यवहार दिखाई दिया। मैं समझता हूं ये सीखने का विषय है। पिछले दिनों हमारे देश के प्रिय कवि नीरज जी हमें छोड़कर चले गए। नीरज जी की विशेषता थी, आशा, भरोसा, दृढसंकल्प, स्वयं पर विश्वास हर बात प्रेरणा दे सकती है। मैं नीरज जी को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं।''
नई स्किल्स सीखें : मोदी ने कहा, "जुलाई और अगस्त का महीना किसानों और सभी नौजवानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। यही वह समय होता है जब कॉलेज का पीक सीजन होता है। मुझे पूरा यकीन है कि मेरे युवा-मित्र कॉलेज जीवन की शुरुआत को लेकर काफी उत्साही और खुश होंगे। आप सभी से मैं यही कहूंगा कि जीवन में भरपूर आनंद लें, लेकिन नई नई चीजें खोजने की प्रवृत्ति बनी रहनी चाहिए। कुछ नई स्किल्स सीखें।''
दृढ़संकल्प से सब हासिल हो सकता है : मोदी ने कहा, "मध्यप्रदेश के अत्यंत गरीब परिवार के आशाराम चौधरी ने जीवन की मुश्किल चुनौतियों को पार करते हुए जोधपुर एम्स की एमबीबीएस की परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। ऐसे कितने ही छात्र हैं जो गरीब परिवार से हैं और विपरीत परिस्थितयों के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया है जो हम सबको प्रेरणा देता है। चाहे वो दिल्ली के प्रिंस कुमार हो या फिर कोलकाता के अभय गुप्ता जिन्होंने पर स्ट्रीट लाइट के नीचे अपनी पढ़ाई की। अहमदाबाद की बिटिया आफरीन शेख हो या नागपुर की बेटी खुशी हो या हरियाणा के कार्तिक या झारखंड के रमेश साहू या फिर गुड़गांव की दिव्यांग बेटी अनुष्का पांडा, जो जन्म से ही स्पाइनल अट्रोफी नामक एक अानुवांशिक बीमारी से पीड़ित है। इन सबने अपने दृढसंकल्प और हौसले से हर बाधा को पार कर कामयाबी हासिल की है। कुछ दिन पहले मेरी नज़र एक ख़बर पर गई, जिसमें लिखा था -'दो युवाओं ने किया मोदी का सपना साकार'। रायबरेली के दो आईटी प्रोफेशनल योगेश साहू और रजनीश बाजपेयी जी ने मेरा चैलेंज स्वीकार किया और एक अनोखा काम किया। दोनों ने अपनी कौशल क्षमताओं का इस्तेमाल कर साथ में काम कर स्मार्ट गांव नाम का एेप बनाई।''
भाईचारे और प्रेम का संदेश देती है संत परंपरा :मोदी ने कहा, "पंढरपुर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले का एक पवित्र शहर है। पंढरपुर वारी अपने आप में एक अद्भुत यात्रा है। इसमें लाखों की संख्या में वारकरी शामिल होते हैं। यह वारी शिक्षा, संस्कार और श्रद्धा की त्रिवेणी है। ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ, रामदास, तुकाराम जैसे अनगिनत संतों की शिक्षाएं आज भी जनसामान्य को शिक्षित कर रही हैं। ये वो लोग थे जिन्होंने समय समय पर समाज को आईना दिखाया। यह सुनिश्चित किया कि पुरानी कुप्रथाएं हमारे समाज से खत्म हों और लोगों में करुणा, समानता और शुचिता संस्कार में आएं।''
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